जहां दीवारें गिरने लगती हैं (सत्यदर्शी जी की दृष्टि)

एक शांत नगर के बीचोंबीच एक पुराना चौक था, जहां हर दिन लोग इकट्ठा होते थे और अपने अपने विचारों का भार लेकर आते थे। कोई अपने धर्म की बात करता था, कोई अपने देश की महानता को साबित करता था, कोई अपने अनुभवों को अंतिम सत्य मानकर दूसरों को समझाने की कोशिश करता था। … Read more