सत्ताईसवाँ अध्याय — आत्मज्ञान के बाद का जीवन सत्यदर्शी जी की दृष्टि

इस अध्याय में सुमन किशोर का प्रश्न और भी व्यावहारिक हो जाता है। अब वे जानना चाहते हैं कि आत्मज्ञान होने के बाद जीवन में वास्तव में क्या बदलता है — क्या केवल अनुभव बदलता है या पूरा जीवन ही नया हो जाता है?सत्यदर्शी जी बताते हैं कि आत्मज्ञान कोई बाहरी उपलब्धि नहीं है, बल्कि … Read more