छब्बीसवाँ अध्याय — अनुभव का स्थिर होना और जीवन में उतारनासत्यदर्शी जी की दृष्टि

आध्यात्मिक मार्ग में एक महत्वपूर्ण चरण वह होता है जब साधक को आत्मा का अनुभव होने लगता है, परंतु उसके सामने एक नई चुनौती खड़ी होती है — इस अनुभव को स्थिर कैसे रखा जाए? छब्बीसवें अध्याय में सुमन किशोर इसी गहराई से यह प्रश्न रखते हैं, और सत्यदर्शी जी इस अवस्था को बड़ी सूक्ष्मता … Read more