(उनतीसवाँ अध्याय)जागृत जीवन की परिपूर्णता — सत्यदर्शी जी की दृष्टि
आध्यात्मिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव वह होता है जब साधना किसी विशेष अभ्यास तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे जीवन में फैल जाती है। उनतीसवें अध्याय में सत्यदर्शी जी इसी जागृत जीवन की परिपूर्णता को समझाते हैं। यहाँ साधक केवल ध्यान के क्षणों में ही नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में जागरूक रहने की क्षमता … Read more