स्थिरता की परिपक्वता — सत्यदर्शी जी की दृष्टि (इक्कीसवाँ अध्याय)
आध्यात्मिक यात्रा के प्रारंभिक चरणों में प्रश्न अधिक होते हैं, अनुभव कम। बीच के चरणों में झलकें मिलती हैं — कभी मौन, कभी साक्षीभाव, कभी गहरी शांति। लेकिन इक्कीसवें अध्याय में सत्यदर्शी जी उस अवस्था की बात करते हैं जहाँ साधना परिपक्व होने लगती है।यह वह बिंदु है जहाँ खोज अब बेचैनी नहीं रहती, बल्कि … Read more