सत्रहवाँ अध्याय: करुणा का महासागर ( जब प्रेम असीम हो जाता है)
दोस्तों, सत्यदर्शी जी की पुस्तक “जिसकी तलाश में मैं भटका, वो मैं ही था” का सत्रहवाँ अध्याय उस अवस्था को प्रकट करता है, जहाँ प्रेम केवल व्यक्तिगत या सीमित नहीं रहता,बल्कि वह असीम करुणा (Infinite Compassion) में बदल जाता है।सोलहवें अध्याय में हमने प्रेम के विस्तार को समझा,अब इस अध्याय में सत्यदर्शी जी बताते हैं … Read more