चौथा अध्याय — “अहंकार का रहस्य”
गुरुदेव, अब मैं समझने लगा हूँ कि मैं साक्षी हूँ और मन मेरे सामने चलता है।लेकिन एक चीज़ अभी भी मुझे बाँधे हुए है —वह है “मैं” की भावना।हर जगह यही लगता है — “मैं कर रहा हूँ”, “मेरे साथ हो रहा है”।क्या यही अहंकार है?सत्यदर्शी जी:हाँ सुमन, यही अहंकार है —“मैं” की वह झूठी … Read more