बीसवाँ अध्याय: जीवन एक लीला ( अंतिम सत्य की सहज अभिव्यक्ति)
दोस्तों, सत्यदर्शी जी की पुस्तक का बीसवाँ (अंतिम) अध्याय इस पूरी आध्यात्मिक यात्रा का सुंदर समापन है।यह वह अवस्था है जहाँ साधक सत्य को जानकर केवल शांत नहीं होता, बल्कि जीवन को एक लीला (Divine Play) के रूप में जीने लगता है।उन्नीसवें अध्याय में हमने पूर्ण स्वतंत्रता को समझा,अब इस अंतिम अध्याय में सत्यदर्शी जी … Read more