उन्नीसवाँ अध्याय: पूर्ण स्वतंत्रता ( जहाँ कुछ भी शेष नहीं रहता)
दोस्तों, सत्यदर्शी जी की पुस्तक का उन्नीसवाँ अध्याय आध्यात्मिक यात्रा के उस मुकाम को दर्शाता है, जहाँ व्यक्ति केवल अनुभव में नहीं रहता, बल्कि पूर्ण स्वतंत्रता (Absolute Freedom) में स्थापित हो जाता है।अठारहवें अध्याय में हमने अस्तित्व में विलय को समझा, जहाँ “मैं” पूरी तरह समाप्त हो जाता है।अब इस अध्याय में सत्यदर्शी जी बताते … Read more