(अट्ठाइसवाँ अध्याय) साक्षीभाव की परिपक्वता — सत्यदर्शी जी की दृष्टि
आध्यात्मिक यात्रा में साक्षीभाव एक महत्वपूर्ण चरण होता है। प्रारंभ में साधक केवल कभी-कभी अपने विचारों और भावनाओं को देख पाता है, लेकिन जैसे-जैसे जागरूकता गहरी होती है, यह देखने की क्षमता स्थिर होने लगती है। अट्ठाइसवें अध्याय में सत्यदर्शी जी इसी साक्षीभाव की परिपक्वता को समझाते हैं।सत्यदर्शी जी बताते हैं कि जब साधक पहली … Read more