बारहवाँ अध्याय: “स्वयं में स्थित होना” — अंतिम ठहराव, अंतिम सत्य

दोस्तों, सत्यदर्शी जी की पुस्तक का बारहवाँ अध्याय किसी निष्कर्ष की तरह नहीं, बल्कि एक मौन की तरह सामने आता है।अगर पूरी पुस्तक एक यात्रा थी —प्रश्न से उत्तर तक,अज्ञान से जागरूकता तक,अहंकार से आत्मबोध तक —तो बारहवाँ अध्याय उस यात्रा का स्थिर बिंदु है।अब खोज नहीं, ठहराव हैसत्यदर्शी जी इस अध्याय में बताते हैं … Read more