सोलहवाँ अध्याय: बिना प्रयास के सुख (सत्यदर्शी जी की दृष्टि)

*जहां कुछ भी करने की जरूरत नहीं रह जाती*एक अनदेखी शांति हर क्षण हमारे आसपास फैली हुई है, पर नजर उसे पकड़ नहीं पाती। जैसे हवा को छूने की कोशिश करो तो वो हाथ में नहीं आती, वैसे ही ये शांति भी किसी प्रयास से नहीं मिलती। जीवन के बीचोंबीच एक ऐसा स्थान है जहां … Read more