पंद्रहवाँ अध्याय: आनंद की धारा (जहाँ हर क्षण पूर्णता से भर जाता है)
दोस्तों, सत्यदर्शी जी की पुस्तक “जिसकी तलाश में मैं भटका, वो मैं ही था” का पंद्रहवाँ अध्याय उस अद्भुत अवस्था को दर्शाता है, जहाँ स्थिरता केवल शांति तक सीमित नहीं रहती,बल्कि वह आनंद (Bliss) में बदल जाती है।चौदहवें अध्याय में हमने अडोल स्थिरता को समझा,अब इस अध्याय में सत्यदर्शी जी बताते हैं —👉 जब चेतना … Read more