आठवाँ अध्याय: शुद्ध अनुभव( जहाँ जानने वाला भी समाप्त हो जाता है)

दोस्तों, सत्यदर्शी जी की पुस्तक “जिसकी तलाश में मैं भटका, वो मैं ही था” का आठवाँ अध्याय आध्यात्मिक यात्रा के एक बेहद सूक्ष्म और गहरे पड़ाव को उजागर करता है।सातवें अध्याय में हमने “पूर्ण स्वतंत्रता” को समझा,लेकिन यहाँ उससे भी आगे की बात कही गई है —👉 अब केवल स्वतंत्रता नहीं, बल्कि “शुद्ध अनुभव” शेष … Read more