अध्याय 25 — अहंकार का भ्रम और सच्चे ‘मैं’ की पहचान

इस अध्याय में सत्यदर्शी जी साधक को उस सबसे सूक्ष्म भ्रम की ओर ले जाते हैं, जिसे समझे बिना आध्यात्मिक यात्रा अधूरी रह जाती है — अहंकार का भ्रम। सुमन किशोर का प्रश्न सीधा है, लेकिन गहरा है: जो “मैं” हर समय बोलता है, क्या वही मेरा वास्तविक स्वरूप है?सत्यदर्शी जी स्पष्ट करते हैं कि … Read more