सातवाँ अध्याय: पूर्ण स्वतंत्रता (‘मैं’ के विलय के बाद का जीवन)

दोस्तों, सत्यदर्शी जी की पुस्तक “जिसकी तलाश में मैं भटका, वो मैं ही था” का सातवाँ अध्याय आध्यात्मिक यात्रा के उस शिखर को दर्शाता है जहाँ साधक पूरी तरह मुक्त हो जाता है।छठे अध्याय में हमने देखा कि अनुभव स्थायी हो जाता है,लेकिन अब इस अध्याय में बताया गया है कि —👉 उस स्थायी अनुभव … Read more