इक्कीसवाँ अध्याय — दुख और उसकी वास्तविकतासत्यदर्शी जी की दृष्टि
इक्कीसवें अध्याय में सुमन किशोर एक बहुत सामान्य लेकिन गहरे प्रश्न को उठाते हैं — यदि आत्मा शुद्ध और अछूती है, तो फिर हमें दुख क्यों होता है?सत्यदर्शी जी इस प्रश्न का उत्तर देते हुए बताते हैं कि दुख आत्मा को नहीं होता, बल्कि मन और अहंकार को होता है। वे समझाते हैं कि जब … Read more