तीसवाँ अध्याय — मौन में अंतिम बोधसत्यदर्शी जी की दृष्टि
तीसवाँ अध्याय इस पूरी आध्यात्मिक यात्रा का अंतिम निष्कर्ष है। यहाँ पहुँचकर साधक यह देखता है कि जिस सत्य की खोज में वह भटकता रहा, वह कभी उससे अलग था ही नहीं। यह अध्याय शब्दों से अधिक अनुभव की ओर संकेत करता है — और अंततः मौन की ओर ले जाता है।सुमन किशोर की जिज्ञासा … Read more