उनतीसवाँ अध्याय — करुणा और एकत्व का अनुभवसत्यदर्शी जी की दृष्टि
इस अध्याय में सत्यदर्शी जी सुमन किशोर को आध्यात्मिक यात्रा के एक अत्यंत सूक्ष्म और गहरे पड़ाव पर ले जाते हैं, जहाँ प्रेम केवल भावना नहीं रहता, बल्कि अस्तित्व का अनुभव बन जाता है। वे बताते हैं कि जब साधक अद्वैत को समझने से आगे बढ़कर उसे जीने लगता है, तब उसके भीतर एक अद्भुत … Read more