(पच्चीसवाँ अध्याय) पूर्णता की अनुभूति — सत्यदर्शी जी की दृष्टि

आध्यात्मिक यात्रा का अंतिम चरण किसी उपलब्धि का क्षण नहीं होता, बल्कि एक गहरी समझ का उदय होता है। पच्चीसवें अध्याय में सत्यदर्शी जी इसी समझ की ओर संकेत करते हैं। यहाँ साधक यह अनुभव करने लगता है कि जिस सत्य की खोज वह बाहर कर रहा था, वह हमेशा से उसके भीतर ही मौजूद … Read more