दसवाँ अध्याय: “पूर्णता का बोध” — जब खोज समाप्त हो जाती है
दोस्तों, सत्यदर्शी जी की पुस्तक का दसवाँ अध्याय पूरी आध्यात्मिक यात्रा का सार है।अगर पहले अध्याय में प्रश्न था — “मैं कौन हूँ?”बीच के अध्यायों में अभ्यास और साक्षीभाव था —तो दसवें अध्याय में उस खोज का परिणाम सामने आता है।यह अध्याय बताता है कि जिस सत्य की तलाश में हम बाहर भटकते रहे, वह … Read more