नौवाँ अध्याय: “स्थिरता की ओर” — जब साधक भीतर बदलने लगता है

दोस्तों, सत्यदर्शी जी की पुस्तक का नौवाँ अध्याय साधना की निरंतरता और उसके परिणामों पर आधारित है।अगर आठवें अध्याय में “अभ्यास” की बात थी, तो नौवें अध्याय में उस अभ्यास के फल की झलक मिलती है।यह अध्याय हमें दिखाता है कि जब व्यक्ति साक्षीभाव में टिकने का प्रयास करता है, तो उसके भीतर क्या परिवर्तन … Read more