संसार और आत्मा का भेद — सत्यदर्शी जी की दृष्टि (सातवां अध्याय)
जब साधक आत्मा की चर्चा सुनता है, तो उसके भीतर एक स्वाभाविक प्रश्न उठता है — यदि आत्मा ही सत्य है, तो यह संसार इतना वास्तविक क्यों लगता है? हम इसमें उलझ क्यों जाते हैं? सातवें अध्याय में सत्यदर्शी जी इसी गहरी जिज्ञासा को स्पष्ट करते हैं।सत्यदर्शी जी कहते हैं कि संसार को पूरी तरह … Read more