आठवाँ अध्याय: “आठवाँ अभ्यास” — अनुभव की दिशा में अंतिम मोड़

दोस्तों, सत्यदर्शी जी की पुस्तक का आठवाँ अध्याय “आठवाँ अभ्यास” केवल सिद्धांत नहीं है — यह अभ्यास है।अगर पिछले अध्यायों में सत्यदर्शी जी ने हमें समझाया कि “मैं शरीर नहीं हूँ”, “मैं मन नहीं हूँ”, “मेरा सच्चा परिचय आत्मा है” — तो इस अध्याय में वे बताते हैं कि इस सत्य को अनुभव कैसे किया … Read more