आत्मा का प्रत्यक्ष अनुभव — सत्यदर्शी जी की दृष्टि (अध्याय 5)

आध्यात्मिक मार्ग में एक समय ऐसा आता है जब समझ तो बन जाती है, पर भीतर एक बेचैनी भी जन्म लेती है। व्यक्ति सुन चुका होता है कि वह आत्मा है, वह साक्षी है, वह शरीर और मन से परे है। लेकिन भीतर से एक आवाज़ उठती है — क्या यह केवल विचार है या … Read more