ज्ञान का उदय — सत्यदर्शी जी की दृष्टि
आध्यात्मिक मार्ग पर एक समय ऐसा आता है जब समझ तो बन जाती है, पर अनुभव स्थिर नहीं होता। व्यक्ति सुनता है कि वह शरीर नहीं, आत्मा है। वह यह भी समझ लेता है कि मन और अहंकार अस्थायी हैं। लेकिन फिर भी भीतर कहीं न कहीं डगमगाहट बनी रहती है। चौथे अध्याय में सत्यदर्शी … Read more