अनाया तीसरे माले के छोटे से कमरे में रहती थी। खिड़की से शहर का पिछला हिस्सा दिखता था, जहाँ दीवारों पर पुराने पोस्टर चिपके रहते थे और शाम को पंछियों की जगह मोटरसाइकिलों की आवाज़ गूंजती थी। ये कमरा कभी उसे अस्थायी लगा था, जैसे किसी स्टेशन पर रुकी हुई सांस, पर अब वही कमरा … Read more