पहला अध्याय — “मैं कौन हूँ?”सत्यदर्शी जी की दृष्टि

पहला अध्याय पूरी किताब की नींव है। यहीं से साधक की वास्तविक यात्रा शुरू होती है — एक ऐसे प्रश्न से, जो साधारण दिखता है लेकिन यदि गहराई से पूछा जाए तो जीवन को पूरी तरह बदल सकता है:“मैं कौन हूँ?” सुमन किशोर इसी प्रश्न के साथ सत्यदर्शी जी के पास आते हैं। वे देखते … Read more