बाईसवाँ अध्याय — दुख का वास्तविक अर्थ (सत्यदर्शी जी की दृष्टि)
आध्यात्मिक मार्ग पर चलते समय एक प्रश्न लगभग हर साधक के मन में उठता है — यदि जीवन का लक्ष्य शांति और आत्मज्ञान है, तो फिर दुख क्यों है? संसार में इतनी पीड़ा क्यों दिखाई देती है? बाईसवें अध्याय में सत्यदर्शी जी इसी गहरे प्रश्न को समझाते हैं।सत्यदर्शी जी कहते हैं कि मनुष्य सामान्यतः दुख … Read more