तेइसवाँ अध्याय — शून्यता का रहस्यसत्यदर्शी जी की दृष्टि
आध्यात्मिक यात्रा के गहरे चरणों में साधक के सामने एक ऐसा अनुभव आता है जिसे शब्दों में समझाना कठिन होता है। इस अवस्था को सत्यदर्शी जी “शून्यता” के रूप में समझाते हैं। तेइसवें अध्याय में सुमन किशोर इसी शून्यता के अर्थ को समझना चाहते हैं, क्योंकि मन सामान्यतः शून्यता को खालीपन या नष्ट हो जाने … Read more