भीतर का अनुभव और मौन का सत्य

मनुष्य सदियों से सत्य की खोज करता आया है। उसने पर्वतों की यात्रा की, तीर्थों में गया, मंदिरों और मस्जिदों में सिर झुकाया। उसे लगा कि परमात्मा कहीं दूर बैठा है और उसे पाने के लिए विशेष स्थानों तक पहुँचना आवश्यक है। इसलिए उसने अनेक कर्मकांड बनाए और उन्हें ही आध्यात्मिक मार्ग समझ लिया। धीरे-धीरे … Read more