(सत्ताइसवाँ अध्याय)जागरूकता का निरंतर प्रवाह — सत्यदर्शी जी की दृष्टि
आध्यात्मिक यात्रा में एक समय ऐसा आता है जब साधक यह समझने लगता है कि जागरूकता केवल ध्यान या विशेष साधना के समय तक सीमित नहीं है। सत्ताइसवें अध्याय में सत्यदर्शी जी इसी बात को स्पष्ट करते हैं कि वास्तविक जागरूकता जीवन के हर क्षण में प्रवाहित हो सकती है।सत्यदर्शी जी कहते हैं कि साधना … Read more