उन्नीसवाँ अध्याय: “सहज जीवन” (जब सब कुछ स्वाभाविक हो जाता है)
दोस्तों, सत्यदर्शी जी की पुस्तक का उन्नीसवाँ अध्याय हमें आध्यात्मिक यात्रा के उस पड़ाव पर ले आता है जहाँ साधना अब प्रयास नहीं रहती, बल्कि जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बन जाती है।शुरुआत में साधक को बहुत प्रयास करना पड़ता है —ध्यान करना पड़ता है,विचारों को देखना पड़ता है,अपने भीतर जागरूकता बनाए रखनी पड़ती है।लेकिन जब … Read more