अठारहवाँ अध्याय: शून्यता का अनुभव ( जहाँ सब कुछ विलीन हो जाता है)
दोस्तों, सत्यदर्शी जी की पुस्तक “जिसकी तलाश में मैं भटका, वो मैं ही था” का अठारहवाँ अध्याय आध्यात्मिक यात्रा के उस अंतिम और अत्यंत सूक्ष्म बिंदु को प्रकट करता है, जहाँ करुणा भी एक नई दिशा लेती है —👉 शून्यता (Emptiness) में विलय।सत्रहवें अध्याय में हमने असीम करुणा को समझा,अब इस अध्याय में सत्यदर्शी जी … Read more