अध्याय 21 — “जो तुम खोज रहे हो, वही तुम हो” सत्यदर्शी जी की वाणी

संध्या का समय था। वातावरण में एक गहरी शांति फैली हुई थी। सुमन किशोर सत्यदर्शी जी के सामने बैठे थे, पर इस बार उनके भीतर कोई नया प्रश्न नहीं था — बल्कि एक थकान थी, खोज की थकान।सत्यदर्शी जी मुस्कुराए और धीरे से बोले —“थक गए हो न?”सुमन ने सिर झुका दिया —“हाँ गुरुदेव… जितना … Read more