दसवाँ अध्याय: दिव्य जीवन ( जब जीवन स्वयं ईश्वर का प्रवाह बन जाता है)
नौवें अध्याय में हमने देखा कि सब कुछ एक ही सत्ता बन जाता है,अब इस अध्याय में बताया गया है —👉 उस एकत्व का जीवन में अनुभव कैसा होता है?अध्याय का मुख्य सार: “जीवन एक लीला है”सत्यदर्शी जी इस अध्याय में कहते हैं:“जीवन अब एक लीला बन जाता है।” इसका अर्थ:जीवन अब संघर्ष नहीं रहतायह … Read more