चौबीसवाँ अध्याय — “ज्ञान का उदय” सत्यदर्शी जी की दृष्टि

तेईसवें अध्याय में जहाँ साधक सच्चे ‘मैं’ की झलक पाता है, वहीं चौबीसवाँ अध्याय उस अनुभव को स्थिर ज्ञान में बदलने की बात करता है। यहाँ सत्यदर्शी जी समझाते हैं कि केवल समझ (understanding) और वास्तविक ज्ञान (realization) में बहुत बड़ा अंतर है।✨ ज्ञान कैसे प्रकट होता है?सत्यदर्शी जी कहते हैं कि ज्ञान किताबों या … Read more